Poems written by Vartika Srivastava

आता नहीं मुझे

आता नहीं मुझे ghazal

मुमकिन को नामुमकिन कह पाना आता नहीं मुझे, सच को झूठ, झूठ को सच दिखलाना आता नहीं मुझे| कद्र नहीं जिन्हें मेरे दिल के अरमानों की, उन्हें दिल से अपना मान पाना आता नहीं मुझे| तल्ख़ लफ़्ज़ हैं जिनके तौहीन