Poems written by Shraddhanvita Tiwari

अगले जनम में

अगले जनम में kavita

अगले जनम में तुम बन जाना ख़ुशी मैं बनूँगी दुःख तब हर एक होंठ पर लाल फूल सा खिल जाना तुम मैं भी बहूँगी हर एक आँख से झरने सी अगले जनम में तुम बन जाना मिसरी मैं बनूँगी नमक

रिश्ते

रिश्ते kavita

होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी जो अस्तित्व में आने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं तपती रेत पर जलकण की तरह कुछ झोंक दिये जाते हैं नफ़रत की भट्टी में और सुलगते रहते हैं जीवन भर कुछ प्रारम्भ