Poems written by Shiv Upadhyay

कुछ मजबूरियां बयां नहीं होती

कुछ मजबूरियां  बयां नहीं होती ghazal

कुछ मजबूरियां बयां नहीं होती वरना ये दूरियां, कहां नहीं होती अन्दर से अब खोखले से लगते हैं तुम जहां रहती थी वहां नहीं होती जाने किस वक्त का इन्तजार है मेरे इन्तजार की इन्तहा नहीं होती बातें तो तुमसे