Poems written by Shilpa Bamboria

सपना

सपना kavita

कितना प्यारा सपना है ये पाना खुद को ही किसी और में एक नये रंग में नयी दिशा में जीवन की एक नयी भोर में सपने तो अखिर सपने होते हैं सुहाने सलोने थोड़े काल्पनिक थोड़े झूठे पर दिल को

मेरी दुआ

मेरी दुआ kavita

महीनों बाद हैं काले बादल छाए भले से लगे अंधेरों के साए गर्म हवाओं से तपती दुपहरी ने बदला हो जैसे अपना रूप ढलने लगी ठंडी शाम बूँदों ने सोख ली धूप एक ओर काले घन घनेरे बादलों की आकृति

ख़्वाब

ख़्वाब kavita

लम्बा सफ़र, थकन ढूंढती थोड़ी सी छाँव धूप की तपिश में सुलगते से पाँव बड़े दिनों से मन को सुकून की ज़रुरत है फिर भी ज़िन्दगी कुछ तो ख़ूबसूरत है कितने जतन से चुराया एक लम्हा, समय से कि बैठ