Poems written by Shikha

मिसरा

मिसरा azad nazm

एक मिसरा कहीं अटक गया है दरमियाँ मेरी ग़ज़ल के जो बहती है तुम तक जाने कितने ख़याल टकराते हैं उससे और लौट आते हैं एक तूफ़ान बनकर कई बार सोचा निकाल ही दूँ उसे तेरे मेरे बीच ये रुकाव क्यूँ?

पन्ना

पन्ना kavita

मैं पन्ना हूँ पन्ना नहीं किसी की आँख का नूर नहीं पन्ना जो हर रोज़ पलटता है एक कोरा पन्ना जिस पर कोई कुछ भी लिख गया हर रोज़… कुछ नया कभी प्यार कभी यातना कभी इतिहास कभी कितनी ही

वक़्त

वक़्त kavita

वक़्त के पास ना आवाज़ है ना आहट बेआवाज़ करवट बदलता है दबे पाँव आता है मिटा जाता है या मिला जाता है खाली कर जाता है या भर जाता है दरारें, शिकवे, हालात किस दिशा आए, कहां गए कोई

सतरंग

सतरंग kavita

तुम्हारे संग एक अध्याय समाप्त हुआ छोटे से जीवन में अध्याय और भी हैं रचना है उन्हें लिखना है अब नीला, हरा, पीला, गेरुआ, गुलाबी और काला जीवन संध्या में लाल वस्त्र पहन बैठ किसी पहाड़ के टीले मेंह बरस