Poems written by Abhilasha

माँ मैं जीना नहीं चाहती !

माँ मैं जीना नहीं चाहती ! kavita

माँ वापिस लौटना चाहती हूँ तुम्हारे पास, अपनी गोद में सर रखने दो न मुझे आज रो लेने दो जी भरकर बच्चा बनने दो न मुझे, मैं बड़ी हुई ही कहाँ थी ? क्योंकि बड़े लोग गल्तियाँ नहीं करते न

An Alternate Day

An Alternate Day prose poem

The flower blossoms, the raindrops touch the petals, rainbow hugs the sky, wind blows in rhythm, the divine souls dance on the earth, the sky claps at all…. when the ice of sentiments melts in between me and you you

सौ बार है नमन

सौ बार है नमन kavita

एक माँ की आज फिर आँख नम हुई राखी लिए बहन की आस थम गई वक़्त की ये मांग कैसी, कैसा ये शोर है शांति बनाने के लिए युद्ध पर ही ज़ोर है सैनिक की मातृभूमि का अमन चला गया