Poems written by Rajeev Gope

Rajeev Gope

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जिन्दगी की पाठशाला से जो कुछ सिखा उसे लफ्जों में पिरो दिया, मैं नहीं जानता आदाब कविता और गजलों के, जिन लफ्ज़ों में तेरी सूरत मुक्क़मल हो वही गज़ल है मेरी !

याद

याद azad nazm

अभी कल शाम से ही इक याद सोई रही आँगन के सिरहाने कितने ख़ुशरंग होते थे ये मौसम भी जब हवाओं में तुम्हारे यहाँ होने के अहसास इतने ज़िन्दा होते थे कि कनखियों से झाँक कर देख लेने का सुकून

तुम

तुम ghazal

ये यादों का मौसम, रोज़ सुनहरा नही रहता दाग रह जाते हैं, सदा जख्म हरा नही रहता यूं तो कोई भी अजनबी नहीं है इस शहर में तेरे जैसा मगर यहाँ, कोई चेहरा नहीं रहता तू खुशबु है हर सम्त