Poems written by Pallavi Kiran

आज है आपसे दूसरी मुलाक़ात

आज है आपसे दूसरी मुलाक़ात azad nazm

आज है आपसे दूसरी मुलाक़ात पहली की मैं क्या कहूँ एक दिन ढूंढ रही थी क़िताबों में एक कवि एक शायर आपकी नज़्मों पर जब अटकी नज़र मेरी गर्दिश-ए-दौर में उस झलक की मैं क्या कहूँ ख़ामोश ज़िन्दगी के अफ़सानों

क्या नया लिखूँ आपके लिए

क्या नया लिखूँ आपके लिए azad nazm

क्या नया लिखूँ आपके लिए जो नहीं कहा अब तक… आज सोचा लिखूँ बहुत कुछ तभी काग़ज़ ने पूछ लिया… है कौन वह जिनके लिए शब्द ढूंढ रही है? क्या नाम है, कितना पहचानती है उसे? मुस्कुरा कर कलम उठा कर