Poems written by Nirdesh Kudeshiya

बेनाम रिश्ता

बेनाम रिश्ता ghazal

क़िताब को वरक-वरक होने से रोके कोई बेनाम रिश्ता ख़त्म होने से रोके कोई मुझे मेरी मोहब्बत की क़दर नहीं कुछ भी बस उस पर सितम होने से रोके काई चाहें तो आज़मा सकते दाँव-पेच हम भी पर ये गुनाह