Poems written by Jinay Mehta

ये बात ना करो

ये बात ना करो kavita

वक़्त की नज़ाकत को समझो आलम गुज़रने की बात ना करो, क़ज़ा भी है महकी हुई अभी बहकी बहकी बातें ना करो, आग लगा दी है जो दिल में उसे बुझाने की बात ना करो, पूनम की चाँदनी खिली है