Poems written by Himanshu Joshi

मेरे विचार मेरे हमसफ़र

मेरे विचार मेरे हमसफ़र kavita

अभी निकला हूँ बड़ी उम्मीद से कि राहें गुलबदन सी रौशन होंगी, उस कुम्हार से हर रोज़ इक ख़्वाहिश लिये चलता हूँ । यूँ ही न भटकता रहूँ मैं इस अपार चराचर में, मंज़िलों का सपना लिए मैं रोज़ भटकता

इंतेज़ार सिर्फ़ तुम्हारा

इंतेज़ार सिर्फ़ तुम्हारा azad nazm

उनकी क़दमों की आहट से दिल जाग उठता है बरसों से सोया हुआ दिल फिर भाग उठता है कभी जो आओ तो ख़बर न देना मुझ को मुझे इस दिल की तमन्ना का एतबार करना है बरसों से सोये हुए