Poems written by Avinash kumar

याद-ए-रफ़्तगा

याद ए रफ़्तगा ghazal

लोगों में कुछ तो ढूंढता हूँ, जाने क्या अंदर नहीं रहता जो सुकूँ आ भी जाए तो फिर, सुकूँ अंदर नहीं रहता सीख ले हदें अपनी समन्दर, फिर समन्दर नहीं रहता क़ैद गिरहों में हो जाए फ़कीर, फिर कलंदर नहीं