Poems written by Atul Panchal

रिसते घावों को सोने दो

रिसते घावों को सोने दो azad nazm

देखो, कुछ देर के लिए सोने दो मेरे रिसते घावों को अभी अभी आई है मेरे प्रश्नों को नींद, मुझे मत कहो ग़ुलाबक बिसरी याद हूँ जाग जाऊँगा, मुझे मत कहो गीत सुलग जाऊँगा बर्फ़ीले पहाड़ों पर मुझे दवा चाहिए

अग्रीमेंट ज़रूरी है

अग्रीमेंट ज़रूरी है vyang

मर्ज़ भले कोई हो ट्रीटमेंट ज़रूरी है जंक फ़ूड के साथ सप्लिमेंट ज़रूरी है रखिये न इसे बाँधकर ज़ोर ज़बरदस्ती से दिल की सेहत के लिए मूवमेंट ज़रूरी है खिल के हँसे मुस्कुराए तो सोचता है दिल क्या फूलों को