Poems written by Atul Panchal

रिसते घावों को सोने दो

रिसते घावों को सोने दो azad nazm

देखो, कुछ देर के लिए सोने दो मेरे रिसते घावों को अभी अभी आई है मेरे प्रश्नों को नींद, मुझे मत कहो ग़ुलाबक बिसरी याद हूँ जाग जाऊँगा, मुझे मत कहो गीत सुलग जाऊँगा बर्फ़ीले पहाड़ों पर मुझे दवा चाहिए