Poems written by Aman Deep

कैसे कहूँ

कैसे कहूँ kavita

क्या कहूँ कैसे कहूँ कहा कुछ जाता नहीं डरता है दिल यह नाराज़ न हो जाये कोई कहीं, भेजा था भगवान ने करने के लिए कुछ ख़ास कभी तो मौका मिलेगा जी रही हूँ यही ले के आस, कोई तो