Poems written by Sachin A. Pandey

नाच रहा है मोर

नाच रहा है मोर kavita

हो गया है भोर, वर्षा हुई घनघोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| बयार चल रही चारों ओर, तृप्त हुआ अवनी का एक-एक छोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| उर में हर्ष नहीं है थोर,

भुलाया नहीं जाता !

भुलाया नहीं जाता ! kavita

संग गुज़री यादों को अब भुलाया नहीं जाता ! दिल में जगे जज़्बातों को अब सुलाया नहीं जाता !! झेल लिए ढेरो सितम उसके हर घड़ी,हर डगर, मगर मासूम-सी उसकी सूरत देख बेवफ़ा उसे बुलाया नहीं जाता ! जी करता