Poems written by Sanjeet

अकेलापन

अकेलापन kavita

अकेलापन वादियों में नहीं शहरों में पलता है। खालीपन तन्हाई तक नहीं, महफ़िलों तक खलता है! जज़्बात उबलने को बहाना चाहिए ‘जीत’, आँखों से ग़म तो मुकम्मल में भी गलता है! नब्ज़ में दर्द और आँखों में पानी! क्या चाहिए

ज़िन्दगी…

ज़िन्दगी... kavita

होने न होने की ज़िद.. ये ज़िन्दगी कभी न जाने की ज़िद.. ये ज़िन्दगी। कभी किश्तों में ज़रा ज़रा.. कभी खालीपन से भरा भरा… जीने की तमन्ना है ज़िन्दगी.. मौत से मुकम्मल… ये ज़िन्दगी!

फिर से लड़कपन

फिर से लड़कपन kavita

मिट्टी के आशियानों में, चलो फिर से घरौंदे बनाते हैं… कच्चे इश्क़ की दीवारों में, हमारा लड़कपन फिर मनाते हैं। मैं दीवाना सा होके फिर, तुम्हारे नाम का दम लूँगा… मेरे दोस्त कहेंगे फिर से, मूहँ पोंछो, वो आते हैं!