Poems written by Deevas

ख़्वाब

ख़्वाब azad nazm

मेरे ही कानों में मेरी आवाज़ कहीं खो सी गई है, पलकें टूट कर बिखर कर बूँद बूँद हो गई हैं, अब मैं बंद आँखों से भी देख लेता हूँ सपने, सोने से पहले तकिये के नीचे रख लेता हूँ

मंज़र

मंज़र kavita

सुबह की गहरी नमी है और सब धुंध लपेटे बैठे हैं, मैं दूर से देखता उनको, वो जो, शाल लपेटे बैठे हैं चेहरे के आँगन पर ढूंढें हवा बहाने बचपन के, जैसे नटखट करे शरारत, झूले अब्बा के अचकन से,

दर्द

दर्द azad nazm

हम पहले एक साथ ही रहते थे, खिड़की से आती धूप दोनों में बंट जाया करती थी, दोनों का रंग एक हो जाता था, दिन भर हम एक दूसरे  के कान में फुसफुसाते रहते, और अपना अपना फ़र्ज़ खूब निभाते

परिचय

परिचय azad nazm

मैंने काग़ज़ के कई परिंदे बनाए, और छोड़ दिए, उड़ते रहते हैं अब यूँ ही मेरे घर की छतों पर, मैं थकान जेबों में भरकर जब भी, घर में रौशनी करता हूँ, तो तितर-बितर हो जाते हैं, और छुप कर

धागे

धागे azad nazm

बचपन में देखते थे, माँ ऊन के दो भारी गोले लेकर, दो तीखी सिलाइयों पर गूंधती रहती थी, प्यार से भी मुलायम उँगलियों से, छोटी छोटी गिरहें बनाती थी, धागे यूँ घूम जाते थे, जैसे किसी बच्चे ने पानी के

उम्मीद

उम्मीद kavita

चलो मौसम को चिठ्ठी लिखें और इंतज़ार करें जवाब का जैसे नादान बच्चा कोई रेत के घर बना कर राह देखता है लहरों की, चलो जज़्बात निचोड़ कर टांग दें रस्सी पर तानों से कसी च्यूँटी से बाँध दें और

तुम

तुम azad nazm

मुद्द्त हुई है तुमसे मिले नज़्में अब तुम्हारा पता पूछा करती हैं, खिड़की पर बैठी तुम्हारी राह देखती हैं मैं लफ़्ज़ों के नए पकवान बनाता हूँ, ये हर्फ़ चखे बग़ैर भी चली जाती हैं, तुम्हारे बग़ैर, नज़्मों का वज़न अब

घाव

घाव azad nazm

छतें ही छतें हैं बस दूर तक जहाँ नज़र हांफने लगे, दराज़ मकान ऊपर तक, जहाँ आँखें अपने ही वज़न से गिरने लगें, हवा में रखी सलीबों पर फंदों से झूलते लोग अपनी अपनी उदासी पर मुस्कानें बनाते हैं, मिटाते

याद

याद kavita

दिल में क़ैद हो तुम, आँखों पे छाई हो, ज़बां पे बैठी हो, हर बात में समाई हो, घुल रही है हर साँस तेरे नाम की खुश्बू में, मज़ा पाता है हर पल, दिल खुद से गुफ्तगु में, ये चाँदनी

बारिश

बारिश kavita

हर बूँद पे तेरे आने का एहसास होता है, ऐसे मौसम में हर पल कोई दिल के पास होता है, फूल रंग वादी कोई मन को बहलाते नहीं, बहल जाने के लिए ये समां ख़ास होता है बादलों में चेहरा