Poems classified as: ग़ज़ल

ये उर्दू शायरी का सबसे पहला और सबसे नियंत्रित रूप है| इसमें हर मिसरे को एक लय में या मीटर में कहा जाता है जो इसे अपने आप में ख़ूबसूरत और मुश्किल भी बनाता है| इस शैली में एक ही विचार पर बात की जाती है मगर इसे सीधे सीधे बयान नहीं किया जाता| ग़ज़ल के कोई दो शेर ऊपरी तौर पर एक दुसरे से मुख्तलिफ हो सकते हैं पर उनके विचार लगभग एक ही होंगे या आलंकृत होंगे| एक ग़ज़ल में कम से कम 5 शेर होना ज़रूरी है| हालांकि पुराने नियम के मुताबिक हद से हद सिर्फ 25 शेर ही हो सकते हैं लेकिन नए दौर में अधिकतम शेरों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई जाती है|

हासिल के दायरे

हासिल के दायरे ghazal

तेरे नाम को हम कब रोते हैं, हासिल के दायरे बहुत छोटे हैं| ना रख कोई ख़लिश दिल में, ख्व़ाब आखिर ख्व़ाब ही होते हैं| हासिल के दायरे बहुत छोटे हैं… यही तो दस्तूर है ज़माने का, मिलकर दिल अक्सर

तुम और मैं

तुम और मैं ghazal

राह-ए-उल्फत में अपना ठिकाना न आया, मुझे रूठना न आया, तुम्हें मनाना न आया| साज़-ए-जिंदिगी ने सुर ऐसा छेड़ा, मुझे गाना न आया, तुम्हें गुनगुनाना न आया| मुझे रूठना न आया, तुम्हें मनाना न आया… बच्चों की तरह गिले भी

अँगार ढूँढता हूँ

अँगार ढूँढता हूँ ghazal

कैसा कर्ज़दार हूँ के सूद लिए साहुकार ढूँढता हूँ, जल रहा हूँ अंदर और पैरों के नीचे अँगार ढूँढता हूँ| न शहर बचा, न घर और न घर में रहने वाले, तन्हाई की धूप में सिर छुपाने को दीवार ढूँढता

शायर

शायर ghazal

जिसे जीने की चाह है, उसे शायर ना बनाओ बड़ी पेचीदा राह है, उसे शायर ना बनाओ। यादों की जमा पूँजी, पड़ी है सो रहने दो जो माज़ी से बेपरवाह है, उसे शायर ना बनाओ। नज़रों के खेल, माना दिलचस्प

चंद लम्हों को

चंद लम्हों को ghazal

चंद लम्हों को कई सदियाँ बना लेते हैं, बनाने वाले ग़मों को भी, खुशियाँ बना लेते हैं| न पंख बचे और अब न हौंसला उड़ने का, शाम होते ही, हम काग़ज़ पर तितलियाँ बना लेते हैं| चंद लम्हों को कई

एक-एक रुपया मेरी जेब का

एक एक रुपया मेरी जेब का ghazal

न खैरात में मिला है, न वसीयत काम आई है, एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है| न शागिर्दी है मिजाज़ में, न बेपनाह हुनर है कोई, मैंने ठोकरें खा-खा कर, अपनी रह बनाई है| एक-एक रुपया

इस शहर की दुकानों में

इस शहर की दुकानों में ghazal

इस शहर की दुकानों में मुझे बेच रहा है हुनर मेरा, मैं खरीद रहा हूँ अपने रास्ते और नीलाम हो रहा है सफ़र मेरा| एक शख्स मेरे अन्दर मुझे जीस्त की मजबूरियां गिनाता है, मैं ढल रहा हूँ बदलते सांचों