चिड़िया सावन वाली

चिड़िया सावन वाली kavita

Photo by goodsophism

एक चिड़िया सावन वाली थी
वो अलबेली अटखेली सी, बूझो न कोई पहेली सी
बोले जो बड़ी सयानी थी, परियों की कोई कहानी थी
वो रंगों की परिभाषा थी, वो सपनों की एक आशा थी
वो गोरी थी न काली, वो चिड़िया सावन वाली थी

वो घर में आँगन सी थी, जो बरसे तो सावन सी थी
वो बच्चों की तुतलाहट थी, कुछ अहसासों की आहट थी
वो छाँव दे रहा एक पीपल
न पत्ता था न डाली थी, वो चिड़िया सावन वाली थी

वो छत पे मिलने आती थी, संगीत नया गा जाती थी
जो पास कभी उसके जाते, वो पंख लगा उड़ जाती थी
अपना तो हल दीवाना था, हम दिन भर गाने गाते थे
वो सात बजे को आती थी हम पाँच बजे आ जाते थे
वो होली न दीवाली थी, वो चिड़िया सावन वाली थी

वो चिड़िया आज न आयी थी, कुछ बुझी हुई हरियाली थी
सावन अब जाने वाला था, और चिड़िया सावन वाली थी
कुछ देर हो गई हमसे थी, वो दूर बहुत दिलवाली थी
बस एक नज़र उसने देखा, जैसे कुछ कहने वाली थी
वो राग न वो क़व्वाली थी, वो चिड़िया सावन वाली थी

आती न तो बात अलग थी, अब याद बड़ी आ जाती हे
पल दो पल की ख़ुशियाँ देके, आज बहुत तड़पाती है
अब और नहीं चाहत मेरी, बस इतना ही तू कर जाना
हो किताब मेरी पूरी, बस इससे पहले मिल जाना|

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I am management professional working for IT company. I love writing my emotions with beautiful words when they overflow. I love poetry due to simple fact of being purest form of sharing emotions.
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